जटिल मूल वाद
असम, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के बीच दशकों पुराने सीमा विवादों से जुड़े, सुप्रीम कोर्ट में लंबित दो सबसे पुराने मूल वादों में वरिष्ठ अधिवक्ता के साथ पेश हुए।
सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में मूल वाद, सिविल अपील, संपत्ति और वैवाहिक विवाद।
कुमार अभिषेक एंड एसोसिएट्स नई दिल्ली से सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली हाई कोर्ट और अन्य हाई कोर्ट में सिविल मुकदमे लड़ता है। इनमें मूल वाद, सिविल अपील, संपत्ति और वैवाहिक विवाद शामिल हैं — राज्यों के बीच के जटिल सीमा विवाद और सुप्रीम कोर्ट की मूल अधिकारिता के मामले भी।
हर मामले की तैयारी रिकॉर्ड को बारीकी से पढ़कर, लागू कानून पर रिसर्च करके और सावधानी से ड्राफ्टिंग करके की जाती है — पहले वाद-पत्र या लिखित बयान से लेकर सुप्रीम कोर्ट में अपील तक।
असम, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के बीच दशकों पुराने सीमा विवादों से जुड़े, सुप्रीम कोर्ट में लंबित दो सबसे पुराने मूल वादों में वरिष्ठ अधिवक्ता के साथ पेश हुए।
प्रमुख जैन तीर्थों में पूजा के अधिकार और स्वामित्व से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। ऐसे ही एक मामले में अलग-अलग पक्षों की ओर से सुप्रीम कोर्ट के 15 से अधिक वरिष्ठ अधिवक्ता पेश हुए थे।
सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट में छात्रों के शैक्षणिक और आपराधिक मामलों में निःशुल्क पैरवी की, जिनमें झूठी FIR रद्द कराने की याचिकाएँ भी शामिल हैं। राजस्थान और बिहार के किसानों के मामले भी लड़े।
यह मुख्य रूप से मुकदमे की रक़म (मूल्य) पर निर्भर करता है। दिल्ली में ₹2 करोड़ से अधिक मूल्य के मुकदमे सामान्यतः दिल्ली हाई कोर्ट के ओरिजिनल साइड में और इससे कम के ज़िला अदालतों में दाख़िल होते हैं। कमर्शियल विवादों पर कमर्शियल कोर्ट्स एक्ट, 2015 की अलग व्यवस्था लागू होती है।
सामान्यतः अनुच्छेद 133 के तहत हाई कोर्ट से मिले प्रमाण-पत्र पर सिविल अपील के ज़रिए, या संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत विशेष अनुमति याचिका के ज़रिए।
यह कानूनी प्रक्रिया के बारे में सामान्य जानकारी है, किसी विशेष मामले पर कानूनी सलाह नहीं।