संवैधानिक कानून और रिट याचिकाएँ

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली हाई कोर्ट और अन्य हाई कोर्ट में रिट याचिकाएँ, विशेष अनुमति याचिकाएँ और संवैधानिक चुनौतियाँ।

संवैधानिक कानून नई दिल्ली स्थित कुमार अभिषेक एंड एसोसिएट्स के काम का केंद्र है। चैंबर सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली हाई कोर्ट और देश के अन्य हाई कोर्ट में रिट याचिकाओं, विशेष अनुमति याचिकाओं (SLP) और संवैधानिक चुनौतियों में सलाह देता है, उनकी ड्राफ्टिंग करता है और पैरवी करता है।

इस काम में मौलिक अधिकार और नागरिक स्वतंत्रता, कानूनों, नियमों और अधिसूचनाओं की वैधता, केंद्र-राज्य संबंधों के सवाल और राज्यों के बीच के मूल वाद शामिल हैं।

किन मामलों में काम करते हैं

  • सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 32 और हाई कोर्ट में अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिकाएँ
  • हाई कोर्ट और ट्रिब्यूनलों के फ़ैसलों के ख़िलाफ़ अनुच्छेद 136 के तहत विशेष अनुमति याचिकाएँ (SLP)
  • कानूनों, नियमों और अधिसूचनाओं की संवैधानिक वैधता को चुनौती
  • मौलिक अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा
  • आरक्षण, भर्ती और सरकारी नौकरी से जुड़े संवैधानिक सवाल
  • अनुच्छेद 131 के तहत मूल वाद, जिनमें राज्यों के बीच के सीमा विवाद भी शामिल हैं
  • अनुच्छेद 25 और 26 के तहत पूजा के अधिकार और धार्मिक संस्थाओं से जुड़े मामले
  • संवैधानिक और चुनाव कानून पर सलाह
अनुभव

प्रमुख मामले और योगदान

धार्मिक और संपत्ति अधिकार

प्रमुख जैन तीर्थों में पूजा के अधिकार और स्वामित्व से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। ऐसे ही एक मामले में अलग-अलग पक्षों की ओर से सुप्रीम कोर्ट के 15 से अधिक वरिष्ठ अधिवक्ता पेश हुए थे।

जटिल मूल वाद

असम, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के बीच दशकों पुराने सीमा विवादों से जुड़े, सुप्रीम कोर्ट में लंबित दो सबसे पुराने मूल वादों में वरिष्ठ अधिवक्ता के साथ पेश हुए।

प्राइवेट इंटरनेशनल लॉ

भारत में ब्रिटिश दूतावास में काम करना चाह रहे एक अमेरिकी नागरिक के विशेष वर्क-परमिट अधिकारों पर दिल्ली हाई कोर्ट में रिपोर्टेड रिट याचिका (2024:DHC:9187) में बहस की।

जनहित और रोज़गार

उत्तर प्रदेश के 8,000 चयनित लेखपाल अभ्यर्थियों की ओर से पैरवी की, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपनी रोक हटाई और उनकी नियुक्ति का रास्ता खुला।

सामान्य जानकारी

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अनुच्छेद 32 और अनुच्छेद 226 की रिट याचिका में क्या अंतर है?

अनुच्छेद 32 के तहत सीधे सुप्रीम कोर्ट जाया जा सकता है, लेकिन केवल मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर। अनुच्छेद 226 हर हाई कोर्ट को मौलिक अधिकारों के साथ-साथ “किसी अन्य उद्देश्य” के लिए भी रिट जारी करने की शक्ति देता है, इसलिए इसका दायरा बड़ा है। व्यवहार में सुप्रीम कोर्ट अक्सर अपेक्षा करता है कि याचिकाकर्ता पहले हाई कोर्ट जाए।

विशेष अनुमति याचिका (SLP) क्या है?

संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत सुप्रीम कोर्ट देश की किसी भी अदालत या ट्रिब्यूनल के फ़ैसले या आदेश के ख़िलाफ़ अपील की विशेष अनुमति दे सकता है। यह कोर्ट के विवेक पर निर्भर है। सुप्रीम कोर्ट नियम, 2013 के अनुसार हाई कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ SLP सामान्यतः फ़ैसले के 90 दिनों के भीतर दाख़िल करनी होती है।

क्या किसी कानून या अधिसूचना की वैधता को अदालत में चुनौती दी जा सकती है?

हाँ। किसी कानून, नियम या अधिसूचना को हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है — जैसे मौलिक अधिकारों के उल्लंघन, विधायिका के अधिकार-क्षेत्र से बाहर होने, या संविधान के अन्य प्रावधानों से टकराव के आधार पर।

यह कानूनी प्रक्रिया के बारे में सामान्य जानकारी है, किसी विशेष मामले पर कानूनी सलाह नहीं।

चैंबर से संपर्क

चैंबर में मुलाक़ात पहले से समय लेकर होती है। संपर्क की जानकारी और फ़ॉर्म संपर्क पेज पर उपलब्ध है।

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