कार्यक्षेत्र

मुख्य कार्यक्षेत्र

नई दिल्ली से सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और ट्रिब्यूनलों में संवैधानिक, सिविल, आपराधिक, आर्बिट्रेशन और सर्विस मामलों की पैरवी।

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संवैधानिक कानून और रिट

रिट याचिकाओं, विशेष अनुमति याचिकाओं (SLP) और संवैधानिक चुनौतियों में सलाह, ड्राफ्टिंग और पैरवी — मौलिक अधिकार, नागरिक स्वतंत्रता, कानूनों की वैधता और केंद्र-राज्य संबंधों से जुड़े सवालों पर।

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सिविल मुकदमे

सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में मूल वाद, सिविल अपील, वैवाहिक और संपत्ति विवाद — राज्यों के बीच के जटिल सीमा विवाद और मूल अधिकारिता (original jurisdiction) के मामलों सहित।

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आपराधिक मामले (ट्रायल और अपील)

आपराधिक मामले के हर चरण में पैरवी — ट्रायल, FIR रद्द कराने (क्वैशिंग) की याचिकाएँ, और नियमित व वैधानिक अपीलें। NDPS एक्ट, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PCA), PMLA और TADA जैसे विशेष कानूनों के मामले भी।

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कमर्शियल लॉ, आर्बिट्रेशन और ADR

अदालतों और संस्थागत व एड-हॉक आर्बिट्रेशन में व्यावसायिक समझ के साथ पैरवी — दिल्ली इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर (DIAC) की कार्यवाहियों सहित।

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सर्विस और प्रशासनिक कानून

शिक्षकों, प्रशासनिक कर्मचारियों व अधिकारियों, न्यायिक अधिकारियों और सरकारी नौकरी के अभ्यर्थियों की ओर से नियुक्ति, पदोन्नति, आरक्षण और सेवा-शर्तों के मामलों में पैरवी।

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रिसर्च, कानूनी सलाह, ड्राफ्टिंग और कानून सुधार

कानून सुधार संस्थाओं, सरकारी निकायों, कंपनियों और व्यक्तियों को सोच-समझकर दी गई कानूनी राय, साथ ही जटिल याचिकाओं और नीतिगत सुझावों की सटीक ड्राफ्टिंग।

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वैवाहिक और पारिवारिक कानून

सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफ़र याचिकाएँ, और दिल्ली हाई कोर्ट में तलाक़, भरण-पोषण, बच्चों की कस्टडी और बुज़ुर्ग माता-पिता के अधिकारों से जुड़ी वैवाहिक अपीलें।

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अनुभव

प्रमुख मामले और योगदान

धार्मिक और संपत्ति अधिकार

प्रमुख जैन तीर्थों में पूजा के अधिकार और स्वामित्व से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। ऐसे ही एक मामले में अलग-अलग पक्षों की ओर से सुप्रीम कोर्ट के 15 से अधिक वरिष्ठ अधिवक्ता पेश हुए थे।

निःशुल्क पैरवी (प्रो बोनो)

सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट में छात्रों के शैक्षणिक और आपराधिक मामलों में निःशुल्क पैरवी की, जिनमें झूठी FIR रद्द कराने की याचिकाएँ भी शामिल हैं। राजस्थान और बिहार के किसानों के मामले भी लड़े।

जनहित और रोज़गार

उत्तर प्रदेश के 8,000 चयनित लेखपाल अभ्यर्थियों की ओर से पैरवी की, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपनी रोक हटाई और उनकी नियुक्ति का रास्ता खुला।

प्राइवेट इंटरनेशनल लॉ

भारत में ब्रिटिश दूतावास में काम करना चाह रहे एक अमेरिकी नागरिक के विशेष वर्क-परमिट अधिकारों पर दिल्ली हाई कोर्ट में रिपोर्टेड रिट याचिका (2024:DHC:9187) में बहस की।

जटिल मूल वाद

असम, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के बीच दशकों पुराने सीमा विवादों से जुड़े, सुप्रीम कोर्ट में लंबित दो सबसे पुराने मूल वादों में वरिष्ठ अधिवक्ता के साथ पेश हुए।

हाई कोर्ट के न्यायाधीश

हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की पेंशन और सेवानिवृत्ति के बाद के लाभों से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए; कोर्ट ने 'वन रैंक वन पेंशन' के सिद्धांत पर उनके पक्ष में फ़ैसला दिया।

न्यायिक सेवा — पदोन्नति

अपर ज़िला न्यायाधीशों (ADJ) की पदोन्नति से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए; सेवा-शर्तों में एकरूपता का सवाल अभी तय होना बाकी है।

न्यायिक अधिकारी — सेवा-शर्तें

न्यायिक अधिकारियों (सिविल जज) के प्रोबेशन और मनमाने ढंग से सेवा समाप्त किए जाने के मामलों में सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए।

न्यायिक सेवा भर्ती

हरियाणा की अनुसूचित जाति की एक महिला न्यायिक सेवा अभ्यर्थी के लिए SLP तैयार की और पैरवी की, जिन्हें सीटें खाली होने के बावजूद मेरिट लिस्ट से बाहर कर दिया गया था।

सर्विस मामले — प्रशासनिक

पदोन्नति, वेतन और अन्य लाभों के भुगतान तथा मनमाने ढंग से सेवा समाप्ति के मामलों में शिक्षकों, प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों की ओर से पैरवी की और उन्हें सलाह दी।

विशेष आपराधिक मामले

नियमित आपराधिक अपीलों में बहस की; TADA के एक मामले में बार-बार आरोप तय किए जाने के मुद्दे पर याचिका तैयार की; और PMLA, 2002 के पिछली तारीख़ से लागू होने तथा NDPS एक्ट के मामलों पर सलाह दी।

कमर्शियल लॉ और आर्बिट्रेशन

कमर्शियल मामले लड़े और दिल्ली इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर (DIAC) की आर्बिट्रेशन कार्यवाही में सुनवाई के दौरान क्लाइंट की ओर से मुख्य बहस की।

चैंबर से संपर्क

चैंबर में मुलाक़ात पहले से समय लेकर होती है। संपर्क की जानकारी और फ़ॉर्म संपर्क पेज पर उपलब्ध है।

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