वैवाहिक और पारिवारिक कानून

सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफ़र याचिकाएँ, और दिल्ली हाई कोर्ट में तलाक़, भरण-पोषण, बच्चों की कस्टडी और बुज़ुर्ग माता-पिता के अधिकारों से जुड़ी वैवाहिक अपीलें।

कुमार अभिषेक एंड एसोसिएट्स नई दिल्ली से वैवाहिक मामलों को अपील के स्तर पर संभालता है — सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफ़र याचिकाएँ, और दिल्ली हाई कोर्ट में तलाक़, भरण-पोषण, बच्चों की कस्टडी और बुज़ुर्ग माता-पिता के अधिकारों से जुड़ी वैवाहिक अपीलें।

वैवाहिक विवाद अक्सर एक साथ कई मोर्चों पर चलते हैं, कभी-कभी अलग-अलग राज्यों की अदालतों में। चैंबर हर मामले को रिकॉर्ड और लागू पर्सनल लॉ पर बारीकी से ध्यान देते हुए तैयार करता है, और जहाँ क्लाइंट के हित में हो, समझौते की संभावना को भी ध्यान में रखता है।

किन मामलों में काम करते हैं

  • वैवाहिक मामलों को एक राज्य से दूसरे राज्य में स्थानांतरित कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफ़र याचिकाएँ
  • तलाक़ से जुड़ी वैवाहिक अपीलें, दिल्ली हाई कोर्ट में
  • भरण-पोषण (मेंटेनेंस) से जुड़ी अपीलें
  • बच्चों की कस्टडी से जुड़ी अपीलें
  • बुज़ुर्ग माता-पिता के अधिकारों से जुड़े मामले
सामान्य जानकारी

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या वैवाहिक मामला दूसरे शहर या राज्य में ट्रांसफ़र हो सकता है?

हाँ। सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) की धारा 25 के तहत सुप्रीम कोर्ट किसी मामले को एक राज्य की अदालत से दूसरे राज्य की अदालत में ट्रांसफ़र कर सकता है। जब पति या पत्नी उस अदालत से दूर रहते हों जहाँ मामला दायर हुआ है, तब ऐसी ट्रांसफ़र याचिकाएँ आम हैं। एक ही राज्य के भीतर हाई कोर्ट या ज़िला अदालत मामला ट्रांसफ़र कर सकती है।

फ़ैमिली कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील कहाँ होती है?

फ़ैमिली कोर्ट्स एक्ट, 1984 की धारा 19 के तहत फ़ैमिली कोर्ट के फ़ैसले या आदेश के ख़िलाफ़ अपील हाई कोर्ट में होती है। दिल्ली में ये अपीलें दिल्ली हाई कोर्ट सुनता है।

आपसी सहमति से तलाक़ में कितना समय लगता है?

हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13B के तहत अर्ज़ी देने से पहले पति-पत्नी का कम से कम एक साल से अलग रहना ज़रूरी है। पहली और दूसरी अर्ज़ी के बीच छह महीने का समय रखा गया है, लेकिन अमरदीप सिंह बनाम हरवीन कौर (2017) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उचित मामलों में यह अवधि माफ़ की जा सकती है।

क्या बुज़ुर्ग माता-पिता अपने बच्चों से भरण-पोषण माँग सकते हैं?

हाँ। जो माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक अपना भरण-पोषण नहीं कर सकते, वे माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत अपने बच्चों से भरण-पोषण माँग सकते हैं। माता-पिता भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 144 (पहले CrPC की धारा 125) के तहत भी भरण-पोषण का दावा कर सकते हैं।

यह कानूनी प्रक्रिया के बारे में सामान्य जानकारी है, किसी विशेष मामले पर कानूनी सलाह नहीं।

चैंबर से संपर्क

चैंबर में मुलाक़ात पहले से समय लेकर होती है। संपर्क की जानकारी और फ़ॉर्म संपर्क पेज पर उपलब्ध है।

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