आपराधिक मामले — ट्रायल और अपील

आपराधिक मामले के हर चरण में पैरवी — ट्रायल से लेकर सुप्रीम कोर्ट में अपील तक।

कुमार अभिषेक एंड एसोसिएट्स आपराधिक प्रक्रिया के हर चरण में क्लाइंट्स की पैरवी करता है — ट्रायल, FIR रद्द कराने (क्वैशिंग) की याचिकाएँ, और वैधानिक व नियमित अपीलें — ट्रायल कोर्ट, दिल्ली हाई कोर्ट और अन्य हाई कोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट में।

इसमें विशेष कानूनों के मामले भी शामिल हैं — जैसे स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम (NDPS), धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PCA) और TADA।

किन मामलों में काम करते हैं

  • सेशन और मजिस्ट्रेट अदालतों में आपराधिक ट्रायल
  • हाई कोर्ट में FIR और आपराधिक कार्यवाही रद्द कराने की याचिकाएँ
  • नियमित और वैधानिक आपराधिक अपीलें, सुप्रीम कोर्ट सहित
  • NDPS एक्ट के मामले
  • PMLA के मामले, जिनमें इसके पिछली तारीख़ से लागू होने के सवाल भी शामिल हैं
  • भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के मामले
  • TADA के मामले, जिनमें आरोप तय करने से जुड़े सवाल भी शामिल हैं
अनुभव

प्रमुख मामले और योगदान

विशेष आपराधिक मामले

नियमित आपराधिक अपीलों में बहस की; TADA के एक मामले में बार-बार आरोप तय किए जाने के मुद्दे पर याचिका तैयार की; और PMLA, 2002 के पिछली तारीख़ से लागू होने तथा NDPS एक्ट के मामलों पर सलाह दी।

निःशुल्क पैरवी (प्रो बोनो)

सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट में छात्रों के शैक्षणिक और आपराधिक मामलों में निःशुल्क पैरवी की, जिनमें झूठी FIR रद्द कराने की याचिकाएँ भी शामिल हैं। राजस्थान और बिहार के किसानों के मामले भी लड़े।

सामान्य जानकारी

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

FIR क्वैश (रद्द) कराने का क्या मतलब है?

हाई कोर्ट अपनी अंतर्निहित शक्तियों — अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 528, पहले दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 482 — और संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत किसी FIR या आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर सकता है, जैसे जब आरोपों से कोई अपराध बनता ही न हो या कार्यवाही प्रक्रिया का दुरुपयोग हो।

क्या नए आपराधिक कानून पुराने मामलों पर भी लागू होते हैं?

1 जुलाई 2024 से BNSS ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की जगह ली है। उस तारीख़ को लंबित अपीलें, जाँच, ट्रायल और अन्वेषण सामान्यतः पुरानी संहिता के तहत ही चलते हैं, इसलिए कौन-सी प्रक्रिया लागू होगी यह इस पर निर्भर है कि मामला कब शुरू हुआ।

यह कानूनी प्रक्रिया के बारे में सामान्य जानकारी है, किसी विशेष मामले पर कानूनी सलाह नहीं।

चैंबर से संपर्क

चैंबर में मुलाक़ात पहले से समय लेकर होती है। संपर्क की जानकारी और फ़ॉर्म संपर्क पेज पर उपलब्ध है।

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